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शिवा पूजा सम्पूर्ण विधि मंत्रो सहित हिंदी में

भगवान शिव को सृष्टि के निर्माणक के रुप में भी जाना जाता है। अगर भगवान शिव की कृपा किसी व्यक्ति पर पड जाये तो वह हर परेशानी का सामना डट कर मुकाबला करके विजय प्राप्त कर ही लेता है। भगवान शिव को भोले के नाम से भी जाते है। अत्यंत भोले होने के कारण उनका नाम भोले पडा है। वह बहुत जल्दी अपने भक्तोंजनों से प्रसन्न हो जाते है जिस कारण उन्हें देवओं ने भोले नाम भी दिया।

 

पुजन विधि

 

अगर आप भगवान शिव को प्रसन्न करना चाहते है तो यह बहुत जरुरी है कि पुजा करते वक्त सही पुजन विधि का पता होना आवश्यक है। आइये जानते है भगवान शिव की पुजन विधि की सही विधि -

 

  1. सोमवार को भगवान शिव के दिन के रुप में जाना जाता है। इस दिन भगवान शिव को व्रत रखने व पुजा अर्चना करने से अत्यंत लाभ होता है। यह व्रत लगातार 16 सोमवार किया जाता है। अगर बीच में कोई व्रत छुट जाये तो यह व्रत क्रम प्रारंभ से शुरु किया जाता है। 16 सोमवार पुरे होने के बाद 17वे सोमवार को उपासना करना न भुलें। इसे उचित लाभ मिलता है।
  2. इस दिन सुर्यादय होने से पुर्व स्नान करना चाहिये।
  3. उसके पश्चात् भगवान शिव व मा पर्वती का नाम 108 बार जाप करना चाहियें।
  4. आराधना के पश्चात् भगवान शिव की प्रतीमा के आगे दिये प्रज्योलित करना चाहिये। भगवान शिव की प्रतीमा पुर्व की दीवार पर ही स्थापित करें। कभी भी उनकी प्रतीमा उत्तर या दक्षिण या पश्चिम दीवार पर नही होनी चाहियें।
  5. दिये प्रज्योलित के पश्चात् बन्धु बन्धाओं के साथ भगवान शिव की व्रत कथा पढनी चाहियें।
  6. व्रत कथा के पश्चात् भगवान शिव की आरती करनी चाहिये।
  7. आरती के पश्चात् शिवलिंग पर जल आर्पित करें।
  8. उसके पश्चात् भगवान शिव को दही, दधु, चीनी, शहद व गंगाजल से बनें पंचामृत का भोग लगाना चाहियें।
  9. भोग लगाने से पश्चात् बन्धु बन्धाओं को प्रसाद दें।

 

मंत्र

 

।। ओम नम शिवाय ।।

 

इस मंत्र का जाप भक्तगणों को रुदाक्ष की माला से 1008 बार करना चाहियें। रुदाक्ष की माला भगवान शिव से सीधे तौर से संबंधित है। रुदाक्ष का मतलब होता है रुदा (भगवान शिव) अक्ष (मतलब आशु)। पुराणनों के अनुसार जब भगवान शिव रोते है तब पृथ्वी पर उनके आशु रुदाक्ष के रुप में गिरते है।

 

पुजा की समाग्री

 

  1. दुध
  2. दही
  3. बेलपत्र
  4. केले
  5. शहद
  6. गंगाजल
  7. धुपबती
  8. दीया
  9. घी
  10. भगवान शिव की प्रतीमा

 

लाभ

 

  • जिन लडकीयों को विवाह संबंधित परेशानी का सामना अपनी जिंदगी में करना पड रहा है उनके लियें यह बहूत उत्तम व्रत है।
  • जो महिलायें पति प्रेम से वंचित है उनके लिये भी यह अत्यंत उत्तम व्रत है।
  • यह व्रत व्यक्ति की जीवन पर पड रहे दुष्प्रभाव को कम करता है।

 

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