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कामाख्या वस्त्र पूजन और प्रयोग विधि हिंदी में, कामाख्या रक्त वस्त्र सिद्ध करने की विधि

कामाख्या अंग वस्त्र का महत्व और प्रयोग करने से लाभ

माँ कामाख्या देवी माँ सती की अंग स्वरूपा के रूप में प्रसिद्ध है, जो जातक कामाख्या देवी की पूजा करता है उसका कार्य या मनोकामना जरूर पूरी हो जाती है, कामाख्या देवी का स्थान कामरु कामाख्या नामक स्थान पर स्थित है |

 

भगवान शिव के तांडव व् वियोग के फल स्वरूप ५१ शक्ति पीठ की उत्पत्ति हुई है, मान्यताओ के अनुसार भगवान विष्णु ने सती के भस्म शरीर को सुदर्शन से अंग भंग कर दिया था और सती के अंग जहा जहा गिरे उसे शक्ति पीठ जाना जाता है |

 

माता सती की योनि कामुरु नामक स्थान पर गिरी थी जिसे आज कामाख्या देवीं का स्थान कहा जाता है, इस स्थान को देवी की ५१शक्ति पीठ में सबसे शक्तिशाली पीठ माना जाता है |

 

और इसी स्थान से एक वस्त्र जिसमे में माता का लाल रक्त लगा होता है प्राप्त किया जाता है जिसे हम कामाख्या अंग वस्त्र कहते है | हर एक पूजा कार्यो में कामाख्या अंग वस्त्र का विशेष महत्त्व है |

 

 

 

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कामाख्या वस्त्र पूजन विधि :

 

सर्व प्रथम कामाख्या अंगवस्त्र को पूरा फैला ले और उसके चारो कोनों और बीच में चन्दन पाउडर, गंगा जल के साथ मिलकर तिलक करे |

 

और इस मंत्र का उच्चारण करे 108 बार :

 

" कामाख्याये वरदे देवी नीलपावर्ता वासिनी |

 

त्व देवी जगत माता योनिमुद्रे नमोस्तुते || "

 

गंगा जल वस्त्र के ऊपर भी छिडक दे, इस से इसकी शुद्धि हो जाएगी,

 

अब इसे काट कर ३ टुकड़े कर ले एक बड़ा टुकड़ा, एक थोड़ा छोटा टुकड़ा और एक बहुत छोटा टुकड़ा ताबीज़ में दाल कर पहनने के लिए |

 

सबसे बड़े टुकड़े को ले और इसे चौकोर लपेट ले और फिर इसे एक लाल चुन्नी में अच्छे से लपेट कर कलावा से बांध दे चारो तरफ से और इसे अपने घर के मंदिर में स्थापित कर दे और प्रतिदिन इसका पूजन करे मंत्र के साथ.

 

अब इस से छोटे टुकड़े को ले और ऊपर की प्रक्रिया करे और इसे आप अपने गल्ले में छुपा कर रखे | प्रति दिन गल्ले में भी धुप बत्ती दिखाए |

 

अब सबसे छोटे टुकड़े को ले और उसे ताबीज़ में डाल कर धारण करे | आप इस मंत्र को भी लिख कर डाल सकते है ताबीज़ में :

 

यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपत्ये |

 

धनधान्य समृद्धिम में देहि दापय स्वाहा ||

 

इस वस्त्र को आप सोमवार या शुक्रवार से प्रयोग करना प्रारम्भ करे और इसे धारण भी इन्ही दिनों में करे |

 

और इसको लगातार २१ दिन तक प्रयोग करे |

 

वस्त्र को धारण करते समय इस मंत्र का जाप भी करे:

 

"कामाख्याम कामसम्पन्ना कामेश्वरी हरप्रिया |

 

कमाना देहि में नित्य कामेश्वरी नमोस्तुते ||”

 

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