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गणेश चतुर्थी पूजा सम्पूर्ण विधि मंत्रो सहित हिंदी में

गणेश चतुर्थी के दिन गणेश की पुजा दिन के मध्याह्न में की जाती है। कई स्थानो पर इस पर्व को विनायक चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन गणेश जी की नई प्रतिमा घर में लायी जाती है। आइये जानते है विस्तार से गणेश जी की पुजन – विधि के बारे में

 

पूजन विधि

 

  1. सबसे पहले गणेश जी की नई प्रतीमा के आगे दीप प्रज्वलन करके संकल्प ले।
  2.  

  3. उसके पश्चात् गणेश जी प्रतिमा के आगे उनका आवाहन किया जाता है। आवाहन करते वक्त इस मंत्र का जाप करें।
  4.  

    ।। हे हेरम्ब त्वमेह्योहि: हाम्बिकात्र्यम्बकात्मज ।।

    ।। सिध्दि – बुध्दि पते: व्यक्ष लक्षलाभ पितु पि: ।।

    ।। नागस्ये नागहारं त्वां गणराजं चतुर्भुजम् ।।

    ।। भूषितं स्वायुधौदव्यै: पाशांकुशपरश्र्वधै ।।

    ।। आवाह्यामि पूजार्थ रक्षार्थ च मम् कृतो: ।।

    ।। इहागत्य गृहाण: त्वं पूजां यागं च रक्ष मे ।।

    ।। ओम सिध्दि – बुध्दि सहिताय: श्री महागणाधिपतये नम: ।।

    ।। आवाहयामि:– स्थापयामि: ।।

     

  5. उसके बाद गणेश की प्रतिमा को प्राण – प्रतिष्ठा इस मंत्र के द्वारा करें।
  6.  

    ।। अस्यै प्राण प्रतिष्ठन्तु: अस्यै प्राणाक्षरन्तु च ।।

    ।। अस्यै देवत्वमर्चायै: मामहेति च कश्र्चन ।।

    ।। ओम सिध्दि – बुध्दि सहिताय: श्री महागणाधिपतये नम: ।।

    ।। सुप्रतिष्ठो: वरदो भव: ।।

     

  7. उसके बाद श्री गणेश को आसन के लिये 5 फुल हाथ में लेकर उनके समक्ष छोड दे।
  8.  

    ।। विचित्ररत्नखीचते: दिव्यास्तरणसयुतम् ।।

    ।। स्वर्ण सिंहासनं चारु गृहाण: गुहाग्रज ।।

    ।। ओम सिध्दि – बुध्दि सहिताय: श्री महागणाधिपतये नम: ।।

    ।। आसनं समर्पयामि: ।।

     

  9. उसके बाद श्री गणेश जी के चरणों को गंगाजल से धोये। धोते समय इस मंत्र का जाप करें।
  10.  

    ।। ओम सर्वतीर्थसमुभ्दूतं पाद्यं गन्धादिभिर्युतम् ।।

    ।। गजानन गृहाणेंद भगवान भक्तवत्सल: ।।

    ।। ओम सिध्दि – बुध्दि सहिताय: श्री महागणाधिपतये नम: ।।

    ।। पादयो: पाद्यं समर्पयामि: ।।

     

  11. उसके पश्चात् भगवान गणेश जी को अर्घ्य समर्पण करें।
  12.  

    ।। ओम गणाध्यक्ष: नमस्तेडस्तु गृहाण करुणा कर ।।

    ।। अर्घ्य च: फल संयुक्तं गन्धमाल्याक्षतैर्युतम् ।।

    ।। ओम सिध्दि – बुध्दि सहिताय: श्री महागणाधिपतये नम: ।।

    ।। हस्तोरर्घ्यं: समर्पयामि: ।।

     

  13. उसके बाद श्री गणेश जी को इस मंत्र का जाप करके जल अर्पित करें।
  14.  

    ।। विघ्नराज नमस्तुभ्यं त्रिदशैरभिवन्दमित ।।

    ।। गड्गोदकेन देवेश कुरुष्वाचमनं प्रभो ।।

    ।। ओम सिध्दि – बुध्दि सहिताय: श्री महागणाधिपतये नम: ।।

    ।। मुखे आचमनीयं समर्पयामि: ।।

     

  15. उसके बाद श्री गणेश जी की प्रतिमा को गंगाजल से स्नान करना चाहिये।
  16.  

    ।। नर्मदा चन्द्रभागादि गड़्गासड्गसजैर्जलै ।।

    ।। स्नानि तोसि मया देव विघ्नसघं निवारय ।।

    ।। ओम सिध्दि – बुध्दि सहिताय: श्री महागणाधिपतये नम: ।।

    ।। सर्वाड़्ग स्नानं समर्पयामि: ।।

     

  17. उसके बाद श्री गणेश जी को पंचामृत से स्नान करना चाहिये। साथ ही साथ यह मंत्र भी जाप करना चाहिये।
  18.  

    ।। पंचामृतं मयाडडनीतं पयोदधि: घृतं मधु ।।

    ।। शर्करा च समायुक्तं स्नानार्थ प्रतिगृह्यताम् ।।

     

  19. उसके बाद श्री गणेश जी को कच्चे दुध से स्नान करायें।
  20.  

    ।। कामधेनु समुभ्दुतं सर्वेषां जीवनं परम् ।।

    ।। तेज पुष्टिकरं दिव्यं स्नानार्थ प्रतिगृह्याताम् ।।

     

  21. उसके बाद श्री गणेश जी को दही से स्नान करना चाहिये।
  22.  

    ।। पयसस्तु समुभ्यूतं मधुराम्लं शशिप्रभम् ।।

    ।। दध्यानीतं मयादेव स्नानार्थ: प्रतिगृह्यताम् ।।

     

  23. उसके बाद श्री गणेश जी को घी से स्नान करना चाहियें।
  24.  

    ।। नवनीत समुत्पन्नं सर्वसंतोषकारकम् ।।

    ।। घृतं तुभ्यं प्रदास्यामि स्नानार्थ: प्रतिगृह्यताम् ।।

     

  25. उसके बाद श्री गणेश जी को शहद से स्नान करना चाहियें।
  26.  

    ।। पुष्परेणुसमुभ्दूतं सुस्बदु मधुरं मधु ।।

    ।। तेज पुष्टिकरंदिव्यं स्नानार्थ: प्रतिगृह्यताम् ।।

     

  27. उसके बाद श्री गणेश जी को चीनी से स्नान करना चाहियें।
  28.  

    ।। इक्षुसारसमुभ्दूतं शर्करा पुष्टि दा शुभा ।।

    ।। मलापहारिका दिव्या स्नानार्थ: प्रतिगृह्याताम् ।।

     

  29. उसके बाद श्री गणेश जी को सुगन्धित तेल से स्नान करना चाहियें।
  30.  

    ।। चम्पाकाशोकबकुल: मालती मोगरादिभि ।।

    ।। वासितं स्निग्धताहेतु तैलं चारु प्रतिगृह्यताम् ।।

     

  31. उसके बाद श्री गणेश जी को साफ जल से स्नान करना चाहियें।
  32.  

    ।। गड्गा च यमुना चैव गोदावरी सरस्वती ।।

    ।। नर्मदा सिन्धु कावेरी स्नानार्थ प्रतिगृह्यताम् ।।

     

  33. उसके बाद श्री गणेश जी को लाल रंग के कपडे की मोली समर्पित करे।
  34.  

    ।। शीतवातोष्ण सन्त्राणं लज्जाया रक्षणं परम ।।

    ।। देहालंकरण वस्त्रमत शान्ति प्रयच्छ मे ।।

    ।। ओम सिध्दि – बुध्दि सहिताय श्री महागणाधिपतये नम: ।।

    ।। वस्त्रं समर्पयामि: ।।

     

  35. उसके पश्चात् श्री गणेश जी के उपर अंगो के लि वस्त्र समर्पित करें.
  36.  

    ।। उत्तरीयँ तथा देव नाना चित्रितमुत्तमम् ।।

    ।। गृहाणेद्र मया भक्तया दत्तं तत् सफली कुरु ।।

    ।। ओम सिध्दि – बुध्दि सहिताय श्री महागणाधिपतये नम: ।।

    ।। उत्तरीय समर्पयामि: ।।

     

  37. उसके बाद श्री गणेश को यज्ञोपवीत समर्पित करना चाहियें।
  38.  

    ।। नवभिस्तन्तुभिर्युक्तं त्रिगुणं देवतामयम् ।।

    ।। उपवीतं मयादत्तं गृहाण परमेश्र्वर ।।

    ।। ओम सिध्दि – बुध्दि सहिताय श्री महागणाधिपतये नम: ।।

    ।। यज्ञोपवीतं समर्पयामि: ।।

     

  39. उसके बाद श्री गणेश जी को सुगन्धित द्रव्य समर्पित करना चाहिये।
  40.  

    ।। श्री खण्ड चन्दन दिव्यं गन्धाढयं सुमनोहरम् ।।

    ।। विलेपणं सुरश्रेष्ठ चन्दनं प्रतिगृह्याताम् ।।

    ।। ओम सिध्दि – बुध्दि सहिताय श्री महागणाधिपतये नम: ।।

    ।। गन्धं समर्पयामि: ।।

     

  41. उसके बाद श्री गणेश जी को चावल समर्पित करे।
  42.  

    ।। अक्षताश्र्च सुर श्रेष्ठ कुंकुमाला सुशोभिता ।।

    ।। मया निवेदितां भक्तया गृहाण परमेश्र्वर ।।

    ।। ओम सिध्दि – बुध्दि सहिताय श्री महागणाधिपतये नम: ।।

    ।। अक्षतान् समर्पयामि: ।।

     

  43. उसके बाद श्री गणेश जी पर फुल माला चढायें
  44.  

    ।। माल्यादीनि सुगन्धीनि माल्यादीनिवै प्रभु: ।।

    ।। मया हृतानि पुष्पाणि गृह्यन्तां पूजनाय भो ।।

    ।। ओम सिध्दि – बुध्दि सहिताय श्री महागणाधिपतये नम: ।।

    ।। पुष्पमालं समर्पयामि: ।।

     

  45. उसके बाद श्री गणेश जी पर शमी पत्र अर्पित करना चाहिये।
  46.  

    ।। त्वत्प्रियाणि सुपुष्पाणि कोमलानि शुभानि वै ।।

    ।। शमीदलानि हेरम्ब गृहाण गणनायक ।।

    ।। ओम सिध्दि – बुध्दि सहिताय श्री महागणाधिपतये नम: ।।

    ।। शमी पत्राणि समर्पयामि ।।

     

  47. उसके बाद श्री गणेश जी पर 3 या 5 दूर्वा अर्पित करें व इस मंत्र का जाप करें।
  48.  

    ।। दुर्वाड्कुरान् सुहरितानमृतान् मड्गल प्रदान् ।।

    ।। आनीतांस्तव पुजार्थ गृहाण गणनायक ।।

    ।। ओम सिध्दि – बुध्दि सहिताय श्री महागणाधिपतये नम: ।।

    ।। दुर्वाड्कुरान् समर्पयामि ।।

     

  49. उसके बाद श्री गणेश जी को लाल सिंदुर का तिलक लगाये। व इस मंत्र का जाप करे।
  50.  

    ।। सिन्दुर शोभनं रक्त सौभाग्यं सुखवर्धनम् ।।

    ।। शुभद् कामदं चैव सिन्दुरं प्रतिगृह्याताम् ।।

    ।। ओम सिध्दि – बुध्दि सहिताय श्री महागणाधिपतये नम: ।।

    ।। सिन्दुर समर्पयामि ।।

     

  51. उसके बाद श्री गणेश जी के आगे धूप जालाये।
  52.  

  53. धूप जालाने के बाद दीप फिर से गणेश जी के आगे जालये।
  54.  

  55. दीप के बाद गणेशजी को नैवेघ अर्पित करें।
  56.  

  57. नैवेघ के बादगणेशजी को चन्दन युक्त जल समर्पित करे।
  58.  

  59. चन्दन युक्त जल समर्पित करने के बाद पान, सुपारी के साथ ताम्बुल अर्पित करें।
  60.  

  61. ताम्बुल के बाद नारियल अर्पित करें।
  62.  

  63. नारियल के बाद श्री गणेश जी को दक्षिणा अर्पित करें। दक्षिणा में 11, 21, 51, 101 501 या 2001 रूपये होने चाहियें। ये दक्षिण की दृष्टि से नम्बर शुभ माने जाते है।

 

विसर्जन विधि

 

  • अब भगवान गणेश जी की आरती करें।
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  • आरती के बाद पुष्पाज्जलि समर्पित करें।
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  • पुष्पाज्जलि के बाद पुष्प अर्पित करें।
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  • पुष्प अर्पित करने के बाद दाये हाथ में चावल व फुल लेकर इस मंत्र का जाप करें।

 

।। आवाहनं न जानामि न जानामि तवार्चनम् ।।

।। पूजां चैव न जानामि क्षमस्व गणेश्र्वर ।।

।। अन्यथा शरणं नास्ति त्वमेव शरणं मम् ।।

।। तस्मात्कारुण्य भावेन रक्षस्व विघ्नेश्र्वर ।।

।। गतं पापं गतं दुखं गतं दारिद्रय मेव च ।।

।। आगता सुख सम्पत्ति पुण्याञ्च तव दर्शनात् ।।

।। मन्त्रहींन क्रियाहींनं भक्तिहीनं सुरेश्र्वर ।।

।। यत्पजितं मया देव परिपुर्ण तदस्त में ।।

।। यदक्षरपद भ्रष्टं मात्राहींन च यभ्दवेत् ।।

।। तत्सर्व क्षम्यतां देव प्रसीद परमेश्र्वर ।।

 

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