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धन्वन्तरि पूजा सम्पूर्ण विधि मंत्रो सहित हिंदी में

धन्वन्तरि भगवान की पुजा दीवाली को की जाती है। आइये जानते है धन्वन्तरि भगवान की पुजा किस प्रकार की जाती है

 

पूजन विधि

 

  1. सर्वप्रथम आचमन करें अपने सीधे हाथ में थोड़ा सा जल ले फिर इस मंत्र का जाप करे
  2.  

    ।। ओम आत्म – तत्त्वं शोधयामि स्वाहा ।।

    ।। ओम विघा – तत्वं शोधयामि स्वाहा ।।

    ।। ओम शिव – तत्वं शोधयामि स्वाहा ।।

     

  3. आचमन करने के बाद हाथ को साफ कर ले। फिर संकल्प करने के लिय थोडा का जल, चावल ओर पुष्प को अपने सीधे हाथ में पकड़ और इस मंत्र का जाप करें
  4.  

    ।। ओम तत्सत् अघैतस्य ब्रह्राणोडह्रि द्वितीय – प्रहरार्ध्दे श्र्वेत – वराह – कल्पे ।।

    ।। जम्बू – द्वीपे भरत – खण्डे अमुक – प्रदेशे अमुक – पुण्य – क्षेत्रे कलियुगे ।।

    ।। कलि – प्रथम – चरणे अमुक – सम्वत्सरे कार्तिक – मासे कृष्ण – पक्षे ।।

    ।। त्रयोदशो – तिथौ अमुक – वासरे अमुक – गोत्रोत्पन्नो अमुक – नाम – अहम् ।।

    ।। श्री धन्वन्तरि – देवता – प्रीति – पूर्वकं आयुष्य –आरोग्य – ऐश्र्वर्य – अभिवृद्ध्यर्थ ।।

    ।। श्री धन्वन्तरि – पूजनमहं करिष्यामि ।।

     

  5. उसके बाद आत्म शोधन के लिये थोडां सा पानी अपने उपर डालते हुये इस मंत्र का जाप करें।
  6.  

    ।। ओम अपवित्र पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोडपि वा ।।

    ।। य स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स ब्राह्राभ्यन्तर शुचि ।।

     

  7. उसके पश्चात् भगवान धनवन्तरी का ध्यान करे।
  8.  

  9. ध्यान के पश्चात् उनके सामने घी का दिया जलाये व साथ ही साथ इस मंत्र का जाप भी करें।
  10.  

    ।। चतुर्भुजं पीत – वस्त्रं सर्वालड्कार – शोभितम् ।।

    ।। ध्याये धन्वन्तरिं देवं सुरासुर – नमस्कृतम् ।।

    ।। युवानं पुण्डरीकाक्षं सर्वाभरण – भूषितम् ।।

    ।। दधानममृतस्यैव कमण्डलुं श्रिया – युतम् ।।

    ।। यज्ञ – भोग – भुजं देवं सुरासुर – नमस्कृतम् ।।

    ।। ध्याये धन्वन्तरिं देवं श्र्वेताम्बर – धरं शुभम् ।।

     

  11. उसके बाद भगवान धनवन्तरी भगवान का आवाहन करते हुये इस मंत्र का जाप करें
  12.  

    ।। आगच्छ देव – देवेश तेजोराशे जगत्यते ।।

    ।। क्रियमाणां मया पूजां गृहाण सुर – सत्तम ।।

    ।। श्री धन्वन्तरि – देवं आवाहयामि ।।

     

  13. उसके बाद पुष्पांजलि के लिये कुछ पुष्प हाथ में ले व इस मंत्र का जाप करें।
  14.  

    ।। नाना – रत्न – समायुक्तं कार्त – स्वर – विभूषितम् ।।

    ।। आसनं देव – देवेश प्रीत्यर्थ प्रति – गृह्राताम् ।।

    ।। श्री धन्वतरि – देवाय आसनार्थे पथ – पुष्पाणि समर्पयामि ।।

     

  15. फिर पुष्प भगवान धनवन्तरि के उपर समर्पित करे। फिर अपने दोनों हाथो को फैला कर उनका स्वागत् करते हुये इस मंत्र का जाप करे।
  16.  

    ।। श्री धन्वन्तरि देव स्वागतम् ।।

     

  17. स्वागत् करने के पश्चात् थोडा सा जल लेकर उनके पैरों को धोयें।
  18.  

  19. पैर धोने के बाद कुछ जल की बुदे भगवान धन्वन्तरि के सिर पर भी छिडके।
  20.  

  21. उसके बाद उन्हे गन्ध अर्पित करें। उसके बाद चन्दन अर्पित करें।
  22.  

  23. चन्दन समर्पित करने के बाद उन्हे पुष्प अर्पित करें।
  24.  

  25. पुष्प अर्पित करने के बाद उनके सामने धूप जलाये।
  26.  

  27. धूप जलाने के बाद उनके समक्ष दीप जलायें।
  28.  

  29. दीप जलाने के बाद उन्हे नैवेघ अर्पित करें।
  30.  

  31. नैवैघ अर्पित करने के बाद उन्हे फिर से जल अर्पित करें
  32.  

  33. जल अर्पित करने के बाद उन्हे ताम्बुल अर्पित करें। ताम्बुल में सुपारी व पान अवश्य होना चाहिये।
  34.  

  35. उसके बाद भगवान धन्वन्तरि के सामने दक्षिणा के तौर पर सगुन रखें।
  36.  

  37. फिऱ कुछ फुल लेकर भगवान धन्वन्तरि के उपर धुमाकर उनके सामने रख दे।
  38.  

  39. फिर उनकी वन्दना करें। वन्दना के पश्चात् 8 दीये जलायें उनके समक्ष जलायें।

 

इसी के साथ धन्वन्तरि पुजा समपन्न होती है।

 

पूजन सामाग्री

 

  1. घी
  2. बत्ती
  3. अगरबत्ती
  4. गंगाजल
  5. कपूर
  6. रोली
  7. चावल
  8. फूल
  9. लाल रंग का कपडा
  10. लकडी का पट्टा

 

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