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कामाख्या देवी मंदिर के 16 अनसुने रहस्य हिंदी में

कामाख्या देवी मंदिर के 16 अनसुने रहस्य हिंदी में भारत के 51 प्रसिध्द् शक्तिपीठों में से एक कामाख्या मंदिर को गिना जाता है। इस स्थान पर मां सति का योनि वाला भाग आकाश से गिरा था। यहां अनेक प्रकार की तंत्र विघियाँ की सिध्दि ली जाती है।

 

आइये जानते है कामाख्या मंदिर के 16 रहस्यों के बारे में जो इस मंदिर को दूसरों से अलग बनाती है।

 

  1. पुराणों के अनुसार जब भगवान शंकर माता सति के मृत शरीर को लेकर अशांत होकर विश्व का भ्रमण कर तब भगवान विष्णु ने उन्हें शांत करने के लिये माता सति के मृत शरीर को अपने सुदर्शन से 51 हिस्सों में बांट दिया था। उसी मृत शरीर में से योनि वाला हिस्सा इस स्थान पर गिरा था। बाद में यहां मंदिर की स्थापना की गई।
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  3. प्राचीन पुराणों के अनुसार जिस जगह मां कामाख्या का मंदिर है उस जगह माता सति देवी के साथ भगवान शंकर भ्रमण के लिये आया करते है और इसी स्थान से भगवान शंकर व माता सति के बीच प्रेम की शुरुआत हूई थी।
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  5. संस्कृत भाषा में प्यार को काम नाम से जाना जाता है जिस कारण इस मंदिर को कामाख्या मंदिर कहा जाने लगा।
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  7. इस मंदिर की सबसे अचमभे की बात यह की यहां कोई प्रतिमा स्थापित नही है। जबकि यह बस माता सति की मृत योनि स्थापित है जो एक प्रकृतिक झरने के कारण सदैव गिली रहती है। यह प्रकृतिक झरना भी कभी प्रसिध्द है। मान्यता है इस झरने का पानी पाने व इसमें स्नान करने से सभी प्रकार की बीमारियां आपसे कोसो दूर रहती है।
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  9. हर वर्ष अम्बुबाची मेला के दिनों में कामाख्या मंदिर के पास स्थित ब्रहापुत्र नदी का जल लाल हो जाता है। यह मेला तीन दिन तक चलता है। उन्हीं तीनों दिनों तक ब्रहापुत्र नदी का जल लाल रहता है। मान्यता है यह लाल रंग का जल मां कामाख्या के मासिक धर्म के कारण होता है।
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  11. यहां प्रसाद के रुप में मासिक धर्म से हुआ गीले कपडें के रुप में दिया जाता है।
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  13. बहते हूए खुन की देवी के रुप में मा कामाख्या देवी को जाना जाता है।
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  15. माता सति का मृत भाग इस मंदिर के गर्भगृह में स्थित है।
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  17. वैसे तो मासिक धर्म में स्त्री को अपवित्र माना जाता है। परन्तु मासिक धर्म में कामाख्या मंदिर को बेहद पवित्र माना जाता है।
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  19. इस मंदिर की सबसे अनोखी बात यह की यहां बस तांत्रिक देवी देवता की प्रतिमा है जैसे धूमवती, कमला, तारा, भेरवी आदि।
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  21. यह प्रसिध्द मंदिर 16 वीं शताब्दी में पूरी तरह बरवाद हो गया था परन्तु बाद में 17 वी शताब्दी में राजा नर नारायण ने इस मंदिर का पुन निर्माण किया। राजा नर नारायण कूच बिहार के राजा थे।
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  23. पुरान कथाओं के अनुसार कामदेव, काम के देवता, उन्होंने एक बार किसी कारण अपना पुरूषत्व खो दिया था। तब वे इसी जगह आकर सती के मृत शरीर के गर्भ ओर योनि की मदद से पुन पुरूषत्व पाया था।
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  25. इस मंदिर में अधुरी सीढियां भी मौजूद है जो नरका राक्षस ने बनवाई थी। पुराण कथा के अनुसार एक बार नरका राक्षस ने देवी कामाख्या के समक्ष विवाह प्रस्ताव भेजा था। नरका राक्षस के द्वारा आया गया विवाह प्रस्ताव से देवी कामाख्या को बहूत क्रोध आया परन्तु उसे सबक सीखने के लिये उसके सामने एक शर्त रखी। शर्त के अनुसार उसे एक रात में कामाख्या देवी के नाम का मंदिर व एक आश्रम गृह बना था। राक्षस नरका ने उनकी शर्त मान ली। जब शर्त के अनुसार राक्षस नरका निर्माण कार्य कर रहा था तब देवी कामाख्या ने एक काक को मुर्गा बना कर कहा जैसे ही उसका कार्य समाप्त होने वाला हो तभी बांग देकर उस सुबह होने की सुचना देना। मुर्गें ने वैसा ही किया। जैसै ही नरका राक्षश मंदिर की सीढी पूरी करके अपना कार्य समाप्त करने वाला था। तभी मुर्गे ने बांग देना शुरु कर दिया जिस कारण यह सीढी अधुरी ही रह गई।
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  27. मुर्गे की बांग सुनकर राक्षस को बहूत क्रोध आया। क्रोध में आकर उस मुर्गे की जान ले ली। जिस कारण उस स्थान को कुकुराकता के नाम से भी जाना जाता है।
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  29. मार्सिक धर्म के दौरान यह मंदिर बंद रहता है। मान्यता है मंदिर के द्वार अपने आप बंद हो जाते है। उन दौरान माता कामाख्या देवी के दर्शन निषेध होते है। क्योकि वक्त उनकी योनि से रक्त प्रवाहित होता है। पर यहां मार्सिक धर्म के तीन दिनों को अम्बूवाची पर्व के रुप में मानाया जाता है।
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  31. वाममार्ग साधना के लिये इस कामाख्या मंदिर को सर्वोच्च पीठ की उपाधी दी गई है।

 

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